राजकीय महाविद्यालय छबडा में स्वतंत्रता के 75 वर्ष ‘अमृत महोत्सव’ के कार्यक्रमों की श्रृंखला में ‘अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस समारोह ‘पर ‘यूथ पीस फ़ाउंडेशन’ के साप्ताहिक कार्यक्रम के तहत ‘वीडियो एवं संभाषण’ तथा आत्मरक्षा की तकनीक जानने एवं सीखने का प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन दिनांक 11.03.2022 को महाविद्यालय के नवीन भवन के सभागार में किया गया।कार्यक्रम की मुख्य अतिथि माननीया श्रीमती पूजा नागर पुलिस उपाधीक्षक छबडा थीं तथा अध्यक्षता प्राचार्य डॉ करुणा जोशी ने की।विशिष्ट अतिथि श्रीमती दीपिका पालीवाल,श्रीमती मीना पालीवाल,श्रीमती भावना पालीवाल तथा वरिष्ठ आत्मरक्षक प्रशिक्षिका स्वतंत्र सैनी निवासी बाराँ थाना थी।मुख्य अतिथि ने अपने उद्बोधन में कहा कि’अपने सामर्थ्य को पहचान कर तदनुरूप जीवन को दिशा देना और निर्भीकता से जटिलताओं का सामना करना ही सशक्तिकरण की पहचान है।कार्यक्रम की अध्यक्ष प्राचार्य डॉ करुणा जोशी ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए ऐतिहासिक वातावरण में गहराई से जड़ें जमा चुकी साहसहीन परिस्थितियों से बाहर निकलकर समय के अनुसार पदचाप करते हुए गति देने एवं संयमित और सुसंस्कृत जीवन जी कर ही अपनी क्षमता को पहचाना जा सकता है।
आत्मरक्षा प्रशिक्षण को उन्होंने स्त्री-पुरुष दोनों की महती आवश्यकता माना और कहा कि आए दिन होने वाली वारदातों एवं हत्याओं की घटनाओं के चलते आत्मरक्षा की महती आवश्यकत्ता समाज के दोनों ही पक्ष स्त्री एवं पुरुष को समान आवश्यकता है।अतः दोनो को हि प्रशिक्षत होने की स्थिति दिखलाई देती है।अत: बचाव के लिए तकनीक की समझ भी दोनों ही पक्षों को ज़रूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों को आत्मरक्षा की कई प्रकार की टेक्निक एवं पॉइंट्स बताएं जिन पर तकनीक का प्रयोग करते हुए हमलावर पर हमला कर अपना बचाव किया जा सके एवं हत्याओं तथा स्त्री शोषण को स्वयं के बचाव द्वारा रोका जा सके
विशिष्ट अतिथि सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती मीना पालीवाल ने समाज की उन नारियों को जो अपनी प्रतिभा से अनभिज्ञ अथवा उचित मार्गदर्शन के अभाव में महत्वपूर्ण कार्य करने में अक्षम रहतीं हैं उनकी मदद करने और उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ने की बात कही।
डॉ गीता सक्सेना सह आचार्य हिन्दी ने कहा कि ‘यूथ पीस फ़ाउंडेशन’ शारीरिक,मानसिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से समाज में प्रेरक वक्तव्यों एवं दृश्यांकन द्वारा जन जागृति ला रहा है।तथा महिला दिवस पर अपने वक्तव्य में कहा कि जीवनदायिनी शक्ति का संचयन नारी अपनी लचीलेपन की प्रवृत्ति के कारण हर साँचे में ढल जाती है।गृह प्रबंधन के साथ सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करने के साथ ही राष्ट्र के बड़े-बड़े फ़ैसलों में भी नारी की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता है। डॉ सीमा राणावत ने कहा कि अन्याय का प्रतिकार करने के लिए नारी ही नहीं पुरुषों को भी आवाज़ उठानी चाहिए।डॉ अतुल श्रीवास्तव ने नारी सशक्तिकरण के अनेक सोपानों बाल वय,किशोर वय तथा युवावस्था के अनुरूप सशक्त होने की बात कही।डॉ सुरेश चन्द वैष्णव ने नारी को सही अर्थों में पुरुष की सहगामिनी कहा और बताया कि आत्मविश्वास से भरपूर नारी ही सशक्त है।डॉ सुनीता नागर ने नारी की शक्ति को पौराणिक संदर्भों से व्याख्यायित किया तथा स्वस्तिवाचन के साथ मंगल कामना की।प्रशिक्षिका श्रीमती स्वतंत्र सैनी ने छात्र-छात्राओं को आत्मरक्षा के गुर सिखाए ‘यूथ पीस फ़ाउंडेशन’ से सहभागी श्री हरीश जी ने पर्यावरणीय चेतना स्वरूप महाविद्यालय प्राचार्य एवं मुख्य अतिथि को पौधा भेंटकर सम्मान दिया तथा पुस्तकालय के लिए प्रेरक व्याख्यानों वाली पुस्तक भी भेंट की।
महाविद्यालय में एक नवीन परंपरा का नवाचार करते हुए तृतीयवर्ष के छात्रों की विदाई प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों द्वारा मिष्टि दही खिलाकर कुमकुम तिलक एवं गुलाल लगाकर पुष्पों से एवम पुष्प मालाओं से तृतीयवर्ष के विद्यार्थियों का भाव बिना विदाई कार्यक्रम उनके उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए पहली बार नवाचार के तहत किया गया। सभी विद्यार्थियों ने बड़े उत्साह से इस में भाग लिया एवं कार्यक्रम के अंत में समारोह को खुशनुमा बनाते हुए विद्यार्थियों ने प्रथक प्रथक समूहों में गर्ल्स एवं बॉयज द्वारा नृत्य प्रस्तुतियों से कार्यक्रम में समां बांध दिया।
अंत में महाविद्यालय के अर्थ शास्त्र विभाग के सह आचार्य श्री बलराज प्रजापति ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया संचालन डॉ गीता सक्सेना ने कि
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