राजीविका समूहों की मधुमक्खी पालन कार्य.
जिला कलक्टर ने किया निरीक्षण
झालावाड़ 11 फरवरी। राजीविका परियोजना झालावाड़ की स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा ब्लॉक अकलेरा के गॉव थनावद में किए जा रहे मधुमक्खी पालन की कॉलोनी साइड का शुक्रवार को जिला कलक्टर डॉ. भारती दीक्षित द्वारा निरीक्षण किया गया।
जिला कलक्टर ने कहा कि मधुमक्खी पालन से प्राप्त शहद, बी-पोलन, मोम, प्रो-पॉलिश, रॉयल जेली, बी-वेनम जैसे उत्पादों की अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में अच्छी मांग है। झालावाड़ में मधुमक्खी पालन की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि राजीविका स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को मधुमक्खी पालन से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना सकती हैं।
जिला कलक्टर को कॉलोनी साइड पर स्वयं सहायता समूह की महिला सोनू पारेता ने बताया कि मधुमक्खी की कॉलोनी के एक फ्रेम में लगभग 2000 मधुमक्खियां होती है। एक बक्से के अंदर 8 फ्रेम होते हैं, और इनमें 1 रानी मधुमक्खी 2 नर मधुमक्खियां, बाकी शेष वर्कर मधुमक्खियां होती है। जिसमें रानी मधुमक्खी अंडे देने का कार्य करती है, एवं वर्कर मधुमक्खियां शहद इकट्ठा करने और बच्चों को पालन-पोषण करती है।
जीवन चक्र को जाना
समूह की सदस्य पवित्रा पारेता ने जिला कलक्टर को मधुमक्खियों के जीवन चक्र को समझाते हुए बताया कि वर्कर मधुमक्खियों का जीवन 40 से 45 दिन का, रानी मधुमक्खियों का जीवन 6 साल का होता है। जिसमें रानी मधुमक्खी 1 दिन में 1500 से 2000 अंडे देती है। जिनका पालन-पोषण वर्कर मक्खियां शहद और बी-पोलन खिलाकर करती है, जिसके माध्यम से कॉलोनी बढ़ती रहती है।
उत्पादन को समझा
पवित्रा पारेता ने बताया कि उन्होंने 200 बॉक्सों से मधुमक्खी पालन की शुरुआत की थी। जिनके माध्यम से 21 क्विंटल शहद निकाल कर क्लस्टर कार्यालय में रखा है, एक बॉक्स से एक माह में एक बार शहद निकाला जा सकता है एक बॉक्स से साल भर में 15 से 20 किलो तक शहद प्राप्त किया जा सकता है।
अन्य उत्पादों की दी जानकारी
वहीं नेशनल बी-बोर्ड के मास्टर ट्रेनर दुर्गाशंकर विश्वकर्मा ने जिला कलक्टर को बताया कि ‘‘शहद‘‘ मधुमक्खी पालन से प्राप्त किया जाने वाला सबसे सस्ता उत्पाद है, मधुमक्खियों से शहद, बी-पोलन, मोम, प्रो पॉलिश, रॉयल जेली एवं बी-वेनम प्राप्त किए जा सकते हैं। जिस पर तकनीक के माध्यम से कार्य किया जा सकता है।
शहद मधुमक्खियों से प्राप्त होने वाला सबसे सस्ता उत्पाद है वहीं अन्य उत्पादों की कीमत अंतरराष्ट्रीय मार्केट में 3000 रूपये किलो से शुरू होती है क्योंकि ये उत्पाद मेडिसिन और कॉस्मेटिक बनाने में काम आते हैं। साथ ही शहद फसल के अनुसार होता है जिसमें सरसों, धनिया, नीम, पलाष, लीची, अजवाइन अनेक प्रकार के शहद प्राप्त किए जाते हैं।
लाभान्वित हुए परिवारों की जानकारी
इस दौरान जिला कलक्टर को जानकारी देते हुए पवित्रा पारेता ने बताया कि 5500 रुपए में एक बॉक्स पूरी कॉलोनी और उपकरणों के साथ बाजार में मिलता है। उन्होंने बताया कि मधुमक्खी पालन 6 ब्लॉक के 400 सदस्यों द्वारा किया जा रहा है जो 600 बक्सों से शहद उत्पादन का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मधुसखी झालावाडी-शहद के नाम से ब्रांड बनाकर प्रीमियम गुणवत्ता वाला शुद्ध शहद मार्केट में बेचा जाएगा। जिसकी बिक्री 8 ब्लॉक की एक कमेटी बनाकर कि जाएगी जिसका लाभ प्रति बॉक्स के हिसाब से वितरित होगा जो बाक्स की संख्या के अनुसार सबंधित सभी महिलाओं के खातों में हस्तांतरित किया जाएगा।
समूह की 40 महिलाओं ने शहद बनाने की प्रक्रिया का दिया डेमोस्ट्रेशन।
जिला कलक्टर ने शहद के मार्केटिंग की विधि पूछने पर महिलाओं ने बताया कि क्लस्टर द्वारा शहद को रॉ-हनी के तौर पर बाकी कंपनियों को सप्लाई किया जा सकता है। ब्रांडेड करके मार्केट में प्रीमियम सेगमेंट में भी बेचा जा सकता है इस पर जिला कलक्टर ने महिलाओं को प्रशासन द्वारा पूर्ण मदद करने का आश्वासन दिया।
इस अवसर पर राजीविका के जिला परियोजना प्रबंधंक महेश चन्द्र गुप्ता, बीडीओ कैलाष मीणा, वायपी प्रवीण राठौर, सन्नी, बीपीएम अकलेरा राजेष रघुवंषी, अभिषेक शर्मा, डीएम लाईवलीहूड़-राजेष कुमार लोधी, डीम एफआई महेश प्रजापति, ग्राम पंचायत थनावद के सरपंच बद्रीलाल उपस्थित रहे।
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