संत शिरोमणि भक्त रैदास (रविदास) जयंती मनाई

Srj news
0

 संत रविदास ने जातिगत भेदभाव दूर कर सनातन धर्म को नई ऊंचाइयां दी : विद्या भारती ।


अन्ता,विद्या भारती द्वारा संचालित आदर्श विद्या मंदिर माध्यमिक विद्यालय बरखेड़ा अन्ता में बुधवार को विद्यालय सभागार में संत शिरोमणि रविदास जयंती का उत्साह पूर्वक आयोजन हुआ।विद्यालय के संस्था प्रधान ओमप्रकाश शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि जयंती के मुख्य अतिथि विद्या भारती प्रांत ग्रामीण शिक्षा प्रमुख मदन सिंह हाडा विशिष्ट अतिथि लोकेश यादव एमडी भुनेश्वर एग्रो अध्यक्षता जिला शारीरिक प्रमुख कुंजबिहारी राठौर ने की कार्यक्रम के मुख्य वक्ता विद्या भारती के जिला सचिव राजेंद्र कुमार शर्मा रहे।कार्यक्रम का शुभारंभ संत रैदास व देव चित्रों के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ किया गया।इस अवसर पर मुख्य वक्ता राजेंद्र शर्मा ने संत रविदास के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संत रविदास ने जातिगत भेदभाव को दूर कर सामाजिक एकता की नींव रखी तथा उन्होने सनातन धर्म को नई ऊंचाईया दी। संत रविदास ने सामाजिक भेदभाव को दूर कर एकता का संदेश दिया और हिंदू संस्कृति के जीवन मूल्यों की रक्षा की इनके जीवन से प्रेरणा लेकर हमें जातिगत भेदभाव से ऊपर उठकर राष्ट्र में कार्य करना चाहिए।इस अवसर पर विद्यालय की कन्या भारती संगठन की बहिनों का शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन हुआ।कार्यक्रम में आचार्य कुंज बिहारी मालव राधारमण नागर राजकुमारी शर्मा मुरलीधर मेहरा मुकेश मालव नविता महावर आनंद कुमार निशा शर्मा प्रीति जंगम संदीप मेघवाल शिव शंकर भूपेन्द्र शर्मा शिवराज गुर्जर उपस्थित रहे आभार व शांति मंत्र के साथ जयंती कार्यक्रम का समापन किया गया यह जानकारी विद्यालय के प्रचार प्रमुख सुरेंद्र मालव द्वारा दी गई।

संत शिरोमणि भक्त रैदास (रविदास) जयंती मनाई

विद्या भारती द्वारा संचालित सुशीला देवी आदर्श विद्या मंदिर छीपाबड़ौद में आज प्रातः कालीन वंदना सभा में रविदास जी की जयंती मनाई गई । विद्यालय के प्रचार प्रसार प्रमुख मेघराज नागर ने जानकारी देते हुए बताया कि मुख्य अतिथि प्रहलाद कुमार मेघवाल के सानिध्य में रविदास जी के चित्र पर माल्यार्पण कर दीपक जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। प्रहलाद कुमार मेघवाल ने रविदास जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि रविदास जी का जन्म वाराणसी के चर्मकार परिवार में हुआ । माघ पूर्णिमा विक्रमी संवत 1433 सन 1376 को । काशी नरेश, झाली रानी, कृष्ण भक्त मीरा इनके शिष्य बने ।इन्होंने जातिगत भेद भुलाकर भगवान की भक्ति को प्राथमिकता दी। रविदास जी ने कहा था 
*मेरी जाति नीची पाती, 
नीचे पोछा जन्म हमारा 
हम शरणागत राजा रामचंद्र के, कही रविदास चमारा*
    रविदास जी ने रामानंद जी को अपना गुरु बनाया तभी रामानंद जी ने इनसे कहा की भक्ति करो भजन लिखो और अपना व्यवसाय भी करते रहो। आज के समय में रविदास जी का व्यक्तित्व आज के जातिगत समाज पर प्रहार करता है, इनके जीवन से प्रेरणा लेकर हम भी जातिगत बंधनों को तोड़ते जाएं और समाज हित में अपना अतुल्य योगदान देते जाएं । विद्यालय के प्रधानाचार्य जोधराज नागर ने मुख्य अतिथि का परिचित व स्वागत करवाया । संचालन शिवराज गोचर ने किया। इस अवसर पर विद्यालय के भैया बहिन व आचार्य दीदी ,सेविका आदि उपस्थित थे।


माघ पूर्णिमा संत रविदास जी की जयंती हर्षोल्लास से मनाई



विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान द्वारा संचालित आदर्श विद्या मंदिर केलखेडी़ छीपाबडौ़द के प्रधानाचार्य हरिसिंह गोचर ने जानकारी देते हुए बताया कि
रविदाजी को पंजाब में रविदास कहा जाता है। उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और राजस्थान में उन्हें रैदास के नाम से ही जाना जाता है। गुजरात और महाराष्ट्र के लोग 'रोहिदास' और बंगाल के लोग उन्हें ‘रुइदास’ कहते हैं। कई पुरानी पांडुलिपियों में उन्हें रायादास, रेदास, रेमदास और रौदास के नाम से भी जाना गया है। माघ मास की पूर्णिमा को जब रविदास जी ने जन्म लिया वह रविवार का दिन था जिसके कारण इनका नाम रविदास रखा गया। उनका जन्म माघ माह की पूर्णिमा को हुआ था। इस वर्ष 16 फरवरी 2022 को उनकी जयंती मनाई जा रही है

उनका जन्म ऐसे समय में हुआ था जब उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में मुगलों का शासन था चारों ओर अत्याचार, गरीबी, भ्रष्टाचार व अशिक्षा का बोलबाला था। उस समय मुस्लिम शासकों द्वारा प्रयास किया जाता था कि अधिकांश हिन्दुओं को मुस्लिम बनाया जाए। संत रविदास जी की प्रसिद्धि निरन्तर बढ़ रही थी जिसके चलते उनके लाखों भक्त थे जिनमें हर जाति के लोग शामिल थे। यह सब देखकर एक मुस्लिम 'सदना पीर' उनको मुसलमान बनाने आया था। उसका सोचना था कि यदि रविदास मुसलमान बन जाते हैं तो उनके लाखों भक्त भी मुस्लिम हो जाएंगे। ऐसा सोचकर उन पर हर प्रकार से दबाव बनाया गया,उनको लालच दिखाया गया,उनको डराया व धमकाया भी गया लेकिन संत रविदास तो हिन्दू समाज के संत थे उन्हें किसी मुस्लिम से मतलब नहीं था। उन्होंने साफ साफ मना कर दिया और कहा
*कुरान बिहश्त न चाहिए, मुझको हूर हजार*
*वेद धर्म त्यागूं नहीं,जो गल चले कटार*
 
*'रैदास जन्म के कारने होत न कोई नीच, नर कूं नीच कर डारि है, ओछे करम की नीच'*
 यानी कोई भी व्यक्ति सिर्फ अपने कर्म से नीच होता है। जो व्यक्ति गलत काम करता है वो नीच होता है। कोई भी व्यक्ति जन्म के हिसाब से कभी नीच नहीं होता। संत रविदास ने अपनी कविताओं के लिए जनसाधारण की ब्रजभाषा का प्रयोग किया है। साथ ही इसमें अवधी, राजस्थानी, खड़ी बोली और रेख्ता शब्दों का भी मिश्रण है। रविदासजी के लगभग चालीस पद सिख धर्म के पवित्र धर्मग्रंथ 'गुरुग्रंथ साहब' में भी सम्मिलित किए गए है।


इसी परम्परा को आगे बढ़ाते हुए संत रविदास जी महाराज ने भी मेवाड़ घराने की बहुरानी मीराबाई को दीक्षित कर हिन्दू समाज को ऊंच-नीच से ऊपर उठाकर गुणपूजा को प्रतिष्ठित करने का संदेश दिया।
*संत रविदास जी महाराज भक्ति आन्दोलन के दैदीप्यमान नक्षत्र थे। हिन्दू समाज उनका चिरकाल तक ऋणी रहेगा*

Post a Comment

0Comments
Post a Comment (0)

ads banner