*विष्णु नायक एक प्रेरणादाई विदाई......* 👀
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*जाते जाते अनजान की सूनी दुनिया को गुलज़ार कर गई मां आशा*
*नेत्रदान कर परिवार को नवीन संस्कार की मरणोपरांत दे गई शिक्षा।*
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नेत्रदान के क्षेत्र में कोटा अब रक्तदान की भांति जागरूकता तेजी से आ रही है। परिवार के एक व्यक्ति के मरणोपरांत किए गए नेत्रदान के पुनीत कार्य से पूरा समाज प्रेरणा लेता है । इसीलिए नेत्रदान का ये संदेश तेजी से अधिकतर घर को रोशन करता जा रहा है। इसमें महत्वपूर्ण ये है कि अगर नेत्रदान कोई *महिला* करे तो पूरा परिवार इस शिक्षा को आसानी से अपना लेता है। *शुक्रवार को इसी तरह एक मां ने नेत्रदान दिया।*
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लायंस क्लब कोटा टेक्नो के डायरेक्टर व टीम जीवनदाता के संस्थापक संयोजक भुवनेश गुप्ता ने बताया कि शुक्रवार को उनके परिवार के नजदीकी दादाबाड़ी निवासी आशा गुप्ता पोरवाल (62) का हृदय गति रुकने से निधन हो गया। *पति धनेश गुप्ता के साथ वे अपने पुत्र मनीष गुप्ता पोरवाल से मिलने अमेरिका जाने की तैयारी में थी।* मेडिकल व्यवसाय से जुड़े देवर प्रवीण गुप्ता पोरवाल व नवीन गुप्ता पोरवाल के अनुसार परिवार में नेत्रदान इससे पहले कभी नहीं हुआ, किंतु सोशल मीडिया पर इसके *पुनीत महत्व* को देखकर निश्चय किया। नेत्रदान से *दो अंधेरी जिंदगियां* रोशन हो सकती है, ये जानकारी उनके लिए मोटिवेशन का बड़ा माध्यम थी। इस कार्य में सहयोग शाइन इंडिया फाउंडेशन के *डॉ कुलवंत गौड़ व ज्योतिमित्र भुवनेश गुप्ता का रहा और आई बैंक सोसायटी के टेक्नीशियन टिंकू ओझा* ने नेत्र संकलित किए।
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*देवर प्रवीण के अनुसार आशा भाभी* अपने पीछे एक अमिट संस्कार को रोपित कर गई जिसकी प्रेरणा का दीया समाज के हर परिवार व हर सदस्य को रोशन करता रहेगा। *पूना में रहने वाली पुत्री शिखा* के भाव थे कि मां ने जीवन भर उनको संस्कारित रहने का मूलमंत्र दिया और जाते जाते भी हमें एक नवीन संस्कार की शिक्षा से जोड़ गई। हम *उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान कर सके,* इस बात की संतुष्टि रही।
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*मिलनसार व सेवा में अग्रणी थी आशा*
परिवार के लोग बताते है कि आशा परिवार की मेरुदंड थी। उन्होंने सामाजिक आयोजनों में कई बार नेत्रदान की इच्छा भी जाहिर की थी। व्यवहार कुशलता व मिलानसारिता में उनका कोई सानी नहीं था। *उन्होंने परिवार को बांधे रखा था और हसमुख प्रवृत्ति से समाज के हर कार्य में अग्रणी रहती थी।*
