जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में हुआ सत्संग समागम*

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 *जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में हुआ सत्संग समागम*



हेमदास झालावाड़ पत्रिका

*संत समागम हरि कथा, तुलसी दुर्लभ दोय।*

*सुत धारा धन लक्ष्मी, पापी के घर होय ।।*

*सत्संग की आधी घड़ी तप के वर्ष हजार।* 

*तो भी बराबर है नहीं, कई कबीर विचार ।।* 

कुंवारिया में हुआ आध्यात्मिक सत्संग ग्रामवासी तथा राजसमन्द तहसील के सत्संग सुनने पहुँचे श्रद्धालु कलियुग में संतों का सत्संग व हरि कथा बहुत दुर्लभ मिलते हैं और जिसे मिल जाए वह बहुत भाग्यशाली होते हैं । इसी कड़ी में कुंवारिया में रविवार को जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी का एक दिवसीय आध्यात्मिक सत्संग समारोह हुआ । सत्संग में संत रामपाल जी महाराज जी ने बताया कि शास्त्रानुकूल भक्ति क्या है पूर्ण मोक्ष कैसे मिलेगा एवं हमें किस प्रभु की भक्ति करनी चाहिए जिससे सर्व दुख दूर होकर सुख व मोक्ष मिले तथा गीता अध्याय 18 श्लोक 62 व 66 में गीता ज्ञान दाता अपने से अन्य किस समर्थ प्रभु की शरण में जाने को कह रहा है वह प्रभु कौन है और उसकी पूजा की विधि क्या है पवित्र चारों वेद पवित्र गीता एवं सूक्ष्मवेद में बताया गया है कि बिना गुरू के मोक्ष संभव नहीं है, पूर्ण गुरू की क्या पहचान है तथा संत - असंत में क्या भेद है आदि बतलाया गया। सभी श्रद्धालुओं ने ध्यानपूर्वक सत्संग सुना एवं शास्त्रों में प्रमाण देखे। सत्संग में आसपास के गांवों व तहसीलों से सैकड़ों श्रद्धालुजन आए

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