वादों के बाद भी किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं,होना सरकार व प्रतिनिधियों की नाकामी को दर्शाता है*

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 *वादों के बाद भी किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं,होना सरकार व प्रतिनिधियों की नाकामी को दर्शाता है*



*मार्च माह से पहले नहीं हुआ समाधान तो होगा बड़ा आंदोलन*


महावीर मूंडली

मांगरोल :- सयुक्त किसान संघर्ष समिति विधान सभा अंता मांगरोल के 10 वे स्थापना दिवस पर कृषि उपज मंडी मांगरोल में आयोजित क्षेत्र के दर्जनों गांवों के किसानों की किसान पंचायत में बड़ी संख्या में शामिल हुए किसानों ने सर्वसम्मति से निंदा प्रस्ताव पारित कर, राज्य व केंद्र सरकार पर किसानों से वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा की सत्ता पाने के लिए 2018 के चुनावो के वक़्त किसानो को उन्नति व विकास की ओर अग्रसर करने के बड़े बड़े वादे व दावे किए गए थे मगर सत्ता में आने के बाद राज्य व केंद्र सरकार अपने ही घोषणा पत्रो, में शामिल किए गए किसानों के वादों से मुकर रही हैं दोनों ही सरकारे , आपसी गठजोड़ से हमेशा की तरह इस बार भी किसान विरोधी नीतियों पर ही काम कर रही है, चुनावो के वक़्त राज्य व केंद्र सरकार द्वारा किसानों की संपूर्ण कर्जा माफी के साथ साथ फसलों का लागत आधारित दाम देने व समर्थन मूल्य निर्धारित करने की बात कहते हुए 2022 में किसानों की आय दुगनी करने का ऐलान किया था मगर वादों को धरातल पर उतारने की बजाए, किसानों पर मनमर्जी के नियम कानून थोपे जा रहे हैं, राज्य सरकार ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में किसानों की फसलों की सुरक्षा व्यवस्था व गोवंश की देखभाल हेतु पंचायत मुख्यालयों पर गौशाला बनाने के साथ साथ खेती किसानों से जुड़े कई वादे किए थे मगर सरकार के साढ़े तीन साल पूरे होने के बाद भी एक भी वादा पूरा नहीं हो पाया, उल्टा किसानों पर दोहरी मार व दोगली नीति अपनाते हुए राज्य सरकार ने डीजल, पेट्रोल पर मनमाना वेट तथा बिजली की दरो में बढ़ोत्तरी करके , किसानों के साथ विश्वाश घात करने का काम किया है, सभा को संबोधित करते हुए समिति सयोजक रामचन्द्र मीणा ने कहा की किसानों के ही द्वारा चुने हुए ,राज्य सरकार में उच्च पदों पर आसीन बारा जिले के जनप्रतिनिधियों की उदासीनता किसानों के प्रति इस क़दर हावी है की 7 माह पहले अतिवृष्टि से बर्बाद उड़द मूंग सोयाबीन आदि खरीफ की फसलों के नुकसान का मुवावजा अन्य जिलों में उक्त क्षेत्र के प्रतिनिधियों की सक्रियता से तत्काल वितरण हो गया था मगर बांरा जिले के, किसानों को बार बार धरना प्रदर्शन आदि करने के बाद भी आज तक ना बीमा क्लेम मिला है और ना ही सरकार में बैठे यहां के प्रतिनिधि मुवावजा दिला पाए है,, यही नहीं 2015 में हुई ओलावृष्टि से बर्बाद फसलों के मुआवजे की मांग करने वाले किसानों पर मांगरोल में लगे झूठे मुकदमों को हटाने का क्षेत्रीय विधायक द्वारा चुनावो के दौरान लिखित आश्वासन देने के बाद भी उस पर अम्ल नहीं हो पाना क्षेत्र के किसानों के साथ धोखा है,,, किसान पंचायत को संबोधित करते हुए नेनुराम बैरवा,इटावा,ने कहा की किसानों को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर लड़ने की आवश्यकता है किसान महापंचायत के संयोजक सत्यनारायण सिंह ने कहा की, जब तक किसान राजनीतिक दलों की गुलामी से मुक्त होकर अपने अधिकारों के लिए संगठित नहीं होगा तब तक किसान का भला सम्भव नहीं है नहरी संघर्ष समिति के अध्यक्ष पवन यादव, ने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों पर किसानों से वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा की सत्ता के मद में चूर प्रतिनिधि किसानों की वाजिब समस्याओं का भी समाधान नहीं कर पा रहे, बल्कि सत्ता पाने की लालशा में लोकतंत्र की हत्या करके सारी हदे पार करने में लगे हुए हैं ऐसे लोगों को अब सत्ता से उखाड़ फेंकने में ही भलाई है,ओम गोचर अंता ने कहा की जब तक पूंजीपति व्यापारी सत्ता पर कब्जा जमाकर रहेंगे किसानों का शोषण होता रहेगा किसान का भला तभी सम्भव होगा जब क्षेत्र से किसान का बेटा सत्ता पर काबिज होगा राकेश उदपुरिया, जिला परिषद सदस्य महेंद्र रिंझीया, दिलीप कुम्हरिया, सीताराम तिसाया ने कहा की किसानों को अपनी मांगो व समस्याओं का समाधान चाहिए तो गांवों गांवों से लामबद्ध होकर आवाज उठानी होगी, सभा समापन के बाद कृषि उपज मंडी से समिति संयोजक रामचन्द्र मीणा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान नारे बाजी करते हुए वाहन रैली के रूप में उपजिला कलेक्टर कार्यलय पहुंचे जहां अपनी 11 सूत्रीय मांगों का मांग पत्र, उपजिला कलेक्टर शत्रुघ्न गुर्जर के माध्यम से मुख्यमंत्री, जिला कलेक्टर,व स्थानीय विधायक के नाम सोपते हुए मार्च माह से पहले पहले समस्याओं के समाधान की मांग की गई तथा समाधान नहीं होने पर समूचे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जनप्रतिनिधियों व सरकार के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी गई,, मांग पत्र में शामिल मांगे, इस प्रकार थी,,

7 माह से अटका पड़ा खरीफ की फसलों का बीमा क्लेम व मुवावजा,देने किसानों की संपूर्ण कर्जा माफी, उपज का समर्थन मूल्य निर्धारित कर फसल खरीद गारंटी कानून लागू करने पंचायत मुख्यालयों पर गौशाला बनाने , वन्य जीव हिरण सूवर, रोंजडो , आदि को किसानों के खेतों में विचरण करने पर रोक लगाते हुए वन्य सीमा में ही रोके जाने , खेती कार्य के दौरान किसी भी कारणवश किसान की मृत्यु उपरांत पीड़ित परिजनों को संबल प्रदान करने हेतु 10 लाख की आर्थिक सहायता देने, किसानों पर लगे झूठे मुकदमों को हटाने,, साथ ही साथ किसानों की जमीन कुर्क करने वाली रोड़ा एकट की धारा को हटाने, क्षेत्र के ग्राम पंचायत जलोदा तेजाजी,शाहपुरा, रायथल,किशनपुरा,महुवा, से जुड़े हुए गांवों की खस्ताहाल सड़कों का शीघ्र नव निर्माण करने सहित वर्षों से अधूरे व लंबित पड़े मांगरोल को सीसवाली से जोड़ने वाले तथा सीसवाली को बारा से जोड़ने वाले बदहाल राजमार्गो का अतिशीघ्र नव निर्माण की मांग शामिल हैं, इस अवसर पर, 

समिति के मीडिया प्रभारी महावीर मूडली , सरपंच बाबूलाल चंदेल, सरपंच भुवनेश मीणा विक्रम सिंह, रामलखन,मीणा ,,,,,,,,,,,,,

जगदीश मऊ, राजेन्द्र सुमन, रामगोपाल बैरवा , महावीर प्रशाद,, विनोद पापडली,, धनराज मीणा, नवल बालूंदा, महेश कुमार राजेन्द्र बैरवा, कृष्ण मुरारी मीणा धनराज महुवा रामरतन, रामचरण मीणा रामनरेश,साहबलाल मनीष कुमार दुर्गाशंकर मीणा सोनू बोरदा सहित बड़ी संख्या में किसान शामिल थे


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