गुरुवाणी से दहेज मुक्त विवाह बिना खर्च के जीने की राह से प्रेरणा पाकर एक दूसरे के बने हमसफर।

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 गुरुवाणी से दहेज मुक्त विवाह बिना खर्च के जीने की राह से प्रेरणा पाकर एक दूसरे के बने हमसफर।


*गुरुवाणी से दहेज मुक्त विवाह बिना खर्च के जीने की राह से प्रेरणा पाकर एक दूसरे के बने हमसफर।*

झालावाड़ हेमदास

पाली। पाली शहर के कबीर भवन, हॉउसिंग बोर्ड मे शनिवार को दो जोड़ो का विवाह तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज की प्रेरणा से दहेज मुक्त व बिना खर्च के गुरुवाणी के द्वारा बिना किसी दिखावे के संपन्न हुआ। 


पाली जिले के सुमेरपुर निवासी रमेशजी की पुत्री दीपा की शादी सिरोही जिले के पिंडवाड़ा निवासी बाबूदासजी के पुत्र लक्ष्मण के साथ तथा सुमेरपुर के ढोला गाँव निवासी भीमाराम जी की पुत्री शांति की शादी सुमेरपुर निवासी रमेशजी के पुत्र ललित के साथ साधारण तरीके से कबीर गुरूवाणी के द्वारा संपन्न हुई। साधारण कपड़ो मे बिना दिखावे व फिज़ूलखर्ची के कम से कम लोगो की उपस्थिति मे विवाह संपन्न किया। 


जिला सेवादार सोहन पंवार ने बताया कि दुल्हा व दुल्हन दोनो संत रामपालजी महाराज की *जीने की राह* पुस्तक को पढ़ व समझकर उनके अनुसार शनिवार दोपहर में सादगीपूर्ण तरीके से बिना सेहरे, बिना घोड़ी, बिना मेहंदी और बिना श्रृंगार के साधारण कपड़ो मे मात्र 17 मिनट मे (असुर निकंदन रमेणी) कबीर गुरूवाणी के द्वारा दूल्हा व दूल्हन के हाथों में रक्षा सूत्र बांधकर सादगी पूर्वक विवाह (रमैणी) संपन्न कराया गया। दोनो परिवारों ने फिजूलखर्ची को रोकने व दिखावे को समाप्त करने और लोगो को जागरूक करने के लिए यह निर्णय लिया। कबीर पंथी संत रामपालजी महाराज के तत्व ज्ञान से प्रभावित होकर पूरे भारत में हजारों लोग इस तरह की शादियां कर फिजूलखर्ची पर लगाम लगा चुके है। *नशा व दहेज मुक्त होगा भारत अपना* के विचारो को साकार करते हुये यह पाली जिले की इस वर्ष 2022 की दूसरी शादी है। अब तक पाली जिले में इस प्रकार की 18 शादियां हो चुकी है।

*बिना दहेज व दिखावे के हुई शादी*

शादी में मात्र 20 लोगो को ही आमंत्रित किया गया। दूल्हा ने एक भी रूपये का भी दहेज नही लिया। यहां तक की जिन साधारण कपड़ों में दुल्हन आई उसी में विदा किया गया। फिजूलखर्च को रोकने के लिए बारातियों को केवल चाय बिस्किट का नाश्ता करवाया गया। डेकोरेशन, स्टेज, डीजे आदि के फिजूल खर्च को खत्म कर साधारण तरीके से शादी हुई। 



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