वादा खिलाफी पर सरकार के खिलाफ जमीनी स्तर पर किसानों में आक्रोश ।
महावीर मूंडली मांगरोल :- संयुक्त किसान संघर्ष समिति विधानसभा अंता मांगरोल के तत्वाधान में 5 फ़रवरी से चलाए गए 10 दिवसीय, किसान जन जागृति अभियान के समापन के दौरान ,, सरकारों की वादा खिलाफी से आहत किसानो ने 2018 के चुनाव में राज्य व केंद्र की सरकार द्वारा किसानों से किए गए दांवे, वं वादो को झूठा व खोखला करार देते हुए क्षेत्र की 18 ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर एक साथ बड़ी संख्या में किसानों ने राज्य व केंद्र सरकार की किसान विरोधी नीतियों तथा वादा खिलाफी को लेकर धरना प्रदर्शन किया तथा अपनी मांगो व समस्याओं के समाधान को लेकर, ग्राम विकास अधिकारी व सरपंचों के जरिए राज्य व केंद्र सरकार के नाम मांग पत्र सौंपे गए,, समिति के मीडिया प्रभारी महावीर मुंडली के अनुसार, समिति के संयोजक रामचन्द्र मीणा के दिशा निर्देशों में ग्राम पंचायत,किशनपुरा,महुवा,
शाहपुरा, में
शोभाग् मुंडला ,महावीर मीणा,धनराज महुवा महेश कुस्या , ग्राम पंचायत ईश्वरपुरा, महलपुर,भटवाड़ा,में
रामलखन झाड़वा, इंद्रजीत मीणा, व बोहत, हिंगोनिया में विक्रम जाट, राजेन्द्र सुमन, गंगाधर भगवानपुरा, महावीर मीणा बाल मुकुंद श्यामपुरा एवं, मऊ , मालबमोरी, झारेला,में जगदीश मीणा , गोबरी लाल बालापुरा, राम गोपाल बैरवा, भवानी शंकर, हरिशंकर मीणा ,तथा जलोदा तेजाजी, छत्रपुरा,उदपुरिया,में रामनरेश मीणा विनोद पापडली, राकेश मीणा के नेतृत्व में तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायतो में सैकड़ों किसानों की तरफ से प्रदर्शन स्वरूप अपनी मांगो व समस्याओं को लेकर मांग पत्र सौंपे, गए क्षेत्र में पहली बार , किसानों की तरफ से सरकारों की वादा खिलाफी को लेकर , विरोध दर्ज कराने का जमीनी स्तर पर इस प्रकार का यह पहला मामला है जिसमें सरकारों के खिलाफ आमजन में गहरा आक्रोश नजर आया, राज्य व केंद्र सरकार के नाम दिए गए मांग पत्र में प्रमुख रूप से,, फसलों का, न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करना, व राष्ट्रीयकृत बैंकों से जुड़े सभी किसानो का कर्जा माफ करना, फसलों की सुरक्षा व्यवस्था हेतु पंचायत मुख्यालयों पर गोशाला का निर्माण करवाना, वन्य जीव हिरण, सूवर, रोजडो, को किसानों के खेतों की बजाए वन्य सीमा में रोके जाने के कारगर उपाय करना, मांगरोल में किसानों पर लगे झूठे मुकदमों का निस्तारण सहित ग्रामीण इलाकों की खस्ताहाल सड़कों का नव निर्माण सहित कई मांगे सामिल है जो सरकारों के साढ़े तीन साल पूरे होने के बाद भी लंबित पड़ी हुई है,, किसानों ने आरोप लगाया की क्षेत्र में हुई अतिवृष्टि से बरबाद हुई खरीफ की फसलों का 7 माह गुज़र जाने के बाद भी क्षेत्र के किसानों को बीमा क्लेम व मुुवावजा नहीं मिल पाना भी किसानों के प्रति स्थानीय जनप्रतिनिधि ओर सरकार की उदासीनता को दर्शा रहा है, किसानों ने कहा की सरकार द्वारा किए गए वादो पर अम्ल नहीं होना तथा किसानों की मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं हो पाना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बात ,है। किसान सरकारों की वादा खिलाफी को कभी बर्दाश्त नहीं करेगा,, अभी सरकार व सरकार के जनप्रतिनिधि सत्ता के मद में चूर है मगर समय रहते किसानो की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो 19 माह बाद होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों में परिणाम भुगतना तय है ,
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